Sunday, 30 March 2014

17. Murabba with mango , goose berry-amla and apple / आम का मुरब्बा, आँवले का मुरब्बा, सेब का मुरब्बा

जब मैं कक्षा बारह में थी , तब मेरठ में पढ़ रही थी । गर्मी की छुट्टियों मैंने फल संरक्षण सरकारी संस्था से पंद्रह दिनों का कोर्स किया । इसमें मैनें कई तरह के फलों से मुरब्बा, जैम, जैली, अचार, स्कैवैस , चटनी और सॉस आदि बनाना सीखा । आज समय बदल गया है, सब कुछ बना-बनाया उपलब्ध है । फिर भी मैंने सोचा कि क्यों न सीखा हुआ सब कुछ सबके साथ बांटा जाए । मैनें ये सब कुछ जब मेरे बच्चे छोटे थे तब सब बनाया है । हर चीज स्वादिष्ट बनती है और साथ ही खराब भी नहीं होती । सबसे महत्त्वपूर्ण घर पर बनाने की वजह से इसमें बरकत है। आशा है कि शायद कुछ लोग लाभान्वित होंगे ।  

                    मुरब्बा
मुरब्बा किसी भी गूदेदार फल से बनाया जाता है । इसमें चीनी की मात्रा लगभग ७५ प्रतिशत होती है । इसमें फल को साबुत या बड़े-बड़े टुकड़ों में काटकर प्रयोग करते हैं ।
मुरब्बा अधिकतर सेब, आम, अदरक, बेल, करौंदा, गाजर, आँवला, पैठा अथवा काशीफल अथवा भोपला, बाँस का बनता है । इसके लिए फल भी ठीक तरह से पका हुआ होना चाहिए । आम और बेल का गूदा हल्का पीलापन लिए हुए हो । अदरक और आँवला बिना रेशे वाला हो । गाजर के अन्दर पीली नस न पड़ी हो ।
फल को साफ पानी से धोकर उसकी रचना के अनुसार छील-काटकर तैयार करते हैं । सेब को छील लेते हैं । आम को छीलकर दो बड़े टुकड़ों और दो छोटे टुकड़ों में काट लेते हैं । आँवला और करौंदा वैसा ही इस्तेमाल किया जाता है। पैठे अथवा काशीफल को छीलकर बड़े-बड़े टुकड़ों में काट लेते हैं । बेल का कड़ा भाग तोड़कर गोल-गोल टुकड़ों में काट लेते हैं । बीज आदि को निकाल लेते हैं । गाजर को खुरचकर आगे-पीछे वाले हिस्से को काट लेते हैं।
फल को छील-काटकर तैयार करके नमक, चूना और फिटकरी के घोल में भिगोते हैं । खट्टे फलों को २ प्रतिशत नमक के घोल में फल को छील-काटकर और गोदने तक भिगोते हैं जैसे कि सेब, आम, करौंदा आदि । २ प्रतिशत फिटकरी के घोल में कसैले फलों को २४ घण्टे व सात दिन तक भिगोते हैं जैसे कि आँवला, हड़ । स्वादरहित फलों को २ प्रतिशत चूने के घोल में भिगोते हैं । इनको भिगोने का समय २ घण्टे से २४ घण्टे तक है जैसे कि पैठा, बेल । उपरोक्त घोलों से फलों को निकालकर साफ पानी में धो लेते हैं जिससे घोलों का असर दूर हो जाए । उबलते हुए पानी में डालकर फलों को २ मिनट से १० मिनट तक उनकी कठोरता के अनुसार उबालते हैं । थोड़ा मुलायम हो जाने पर फल को निकालकर तुरन्त ठंडे पानी में डाल देते हैं जिससे वह ठंडा हो जाए । ठंडे पानी से निकालकर फल को थोड़ी देर के लिए रख देते हैं जिससे उनका पानी निचुड़ जाए ।
गोदने की क्रिया मुरब्बा बनाने में एक विशेष महत्त्व रखती है । फल जितना अच्छा गुदा होता है , मुरब्बा उतना ही अच्छा और स्वादिष्ट बनता है क्योंकि गोदने से फल के अन्दर का पानी बाहर निकलता है और उसके अनुसार ही चीनी अन्दर तक पहुँचती है जिससे मुरब्बा खराब नहीं होता है । इसलिए फल को इस प्रकार चारों तरफ से गोदना चाहिए कि गोदने के बाद फल का आकार न बिगड़ने पाए । गोदने की क्रिया फल को उबालने से पहले भी की जाती है जो फल उबालने से पहले टूट जाते हैं , उन फलों को उबालने के बाद गोदा जाता है। उबालने से पहले गोदने पर फल को घोल में भिगोने से पहले गोदते हैं । तैयार फल में चीनी मिलाई जाती है । एक किलोग्राम तैयार फल के टुकड़ों में एक किलोग्राम से डेढ़ किलोग्राम तक चीनी मिलाई जाती है । चीनी मिलाने के दो तरीके हैं । प्रथम विधि में -भगोने में एक तह चीनी की बिछा लेते हैं फिर उसके ऊपर एक तह फल की लगाते हैं । फल के ऊपर एक तह चीनी की ओर लगाते हैं । इसी तरह से फल और चीनी की तह बिछाते हैं। सबसे आखिरी तह चीनी की रखते हैं । भगोने को ढककर २४ घण्टे के लिए रख देते हैं। दूसरे दिन फल में से पानी निकलने से चीनी का घोल बन जाता है । भगोने को आग पर रख देते हैं । चीनी घुल जाने पर फल को बाहर निकाल लेते हैं । उबाल आने पर एक किलोग्राम चीनी में ६ से १० ग्राम के हिसाब से साइट्रिक एसिड मिला देते हैं। चासनी को छानकर फल के टुकड़ों में डाल देते हैं ।
भगोने को चौबीस घण्टे के लिए फिर छोड़ देते हैं । दूसरे दिन फल को निकाल कर चासनी को थोड़ा-सा गाढ़ा करते हैं। चासनी गाढ़ी हो जाने पर फल को डालकर दो दिन के लिए छोड़ देते हैं । फिर फल को निकालकर चासनी को गाढ़ा करने की क्रिया करते हैं। यही क्रिया दो-तीन बार दोहराई जाती है । आखिरी बार चासनी को इतना गाढ़ा करते हैं कि वो शहद की तरह गाढ़ी हो जाए । चासनी में फल को डालकर एक-दो उबाल देते हैं। तैयार मुरब्बे को आग से उतार कर ठंडा करके मर्तबान में भर लेते हैं ।
दूसरी विधि में एक किलो चीनी में लगभग आधा किलोग्राम पानी मिलाकर चासनी बना लेते हैं । उबाल आने पर साइट्रिक एसिड डाल देते हैं। छानकर इसमें फल के टुकड़ों को डाल देते हैं। इसके बाद चासनी को गाढ़ा करने की क्रिया प्रथम विधि के अनुसार ही है । चासनी वाले मुरब्बे को "तर मुरब्बा" कहते हैं ।
एक मुरब्बा और होता है- सूखा मुरब्बा । इस मुरब्बे के दो प्रकार होते हैं-
१. चमकदार मुरब्बा- इसको बनाने के लिए पहले तर मुरब्बा बनाया जाता है और चासनी को काफी गाढ़ा कर लेते हैं । अब इस चासनी में फल के टुकड़ों को लपेट-लपेट कर तार की जाली में रखकर छाया में सुखाते हैं। फल के टुकड़ों में चासनी लिपट जाने से उनमें चमक आ जाती है।
२. दानेदार मुरब्बा- इसके लिए भी पहले तर मुरब्बा बनाया जाता है । चासनी को गाढ़ा करके फल के टुकड़ों को निकाल कर तार की जाली में सुखाते हैं। सूखे हुए टुकड़ों को सूखी चीनी में लपेट-लपेट कर फिर सुखाते हैं। सूखने पर सूखी चीनी की पर्तें फल में दो-तीन बार लगाईं जाती हैं।
                     आम का मुरब्बा
सामग्री- साढ़े पाँच किलो आम जिसमें से गूदा ढ़ाई किलोग्राम प्राप्त होगा । चीनी- पौने चार किलोग्राम, साइट्रिक एसिड-१५ ग्राम ।
विधि- उपरोक्त विधि से मुरब्बा बनाना है ।
                       आँवले का मुरब्बा
सामग्री- आँवला- ५ किलोग्राम, चीनी- साढ़े सात किलोग्राम, साइट्रिक एसिड- १५ ग्राम ।
विधि- उपरोक्त विधि से मुरब्बा बनाना है ।
                        सेब का मुरब्बा
सामग्री- सेब ४ किलोग्राम, चीनी-५ किलोग्राम, साइट्रिक एसिड-१० ग्राम ।
विधि- उपरोक्त विधि से मुरब्बा बनाना है ।
  

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