जब मैं कक्षा बारह में थी , तब मेरठ में पढ़ रही थी । गर्मी की छुट्टियों मैंने फल संरक्षण सरकारी संस्था से पंद्रह दिनों का कोर्स किया । इसमें मैनें कई तरह के फलों से मुरब्बा, जैम, जैली, अचार, स्कैवैस , चटनी और सॉस आदि बनाना सीखा । आज समय बदल गया है, सब कुछ बना-बनाया उपलब्ध है । फिर भी मैंने सोचा कि क्यों न सीखा हुआ सब कुछ सबके साथ बांटा जाए । मैनें ये सब कुछ जब मेरे बच्चे छोटे थे तब सब बनाया है । हर चीज स्वादिष्ट बनती है और साथ ही खराब भी नहीं होती । सबसे महत्त्वपूर्ण घर पर बनाने की वजह से इसमें बरकत है। आशा है कि शायद कुछ लोग लाभान्वित होंगे ।
जैम
जैम अधिकतर सेब, आम, आड़ू,
आलूचा, अन्नानास, रसभरि,
स्ट्राबरि आदि फलों से बनाया जाता है । जैम के लिए फल न अधिक कच्चा और
न अधिक पक्का होना चाहिए । फल को साफ पानी में धोकर न खाने वाले हिस्सों को काटकर फल
की बनावट के अनुसार छील-काटकर फल का मिश्रण तैयार कर लेते हैं जैसे कि सेब और आम को
छीलते हैं, आड़ू और आलूचे का प्रयोग साबुत करते हैं और स्ट्राबरी
के ऊपर का पत्तियों वाला निकाल देते हैं । फिर फलों के टुकड़ों में इतना पानी डालते
हैं कि फल को गलाने के लिए ही पानी हो, ऐसे फल गला लेते हैं ।
पर स्ट्राबरी को बिना पानी के गलाते हैं । प्राप्त गूदे में चीनी मिलाते हैं । एक किलो
तैयार गूदे में ७५० ग्राम से एक किलोग्राम तक चीनी मिलाते हैं । चीनी मिलाकर मिश्रण
को आँच पर पकने रख देते हैं और उसको बराबर चलाते रहते हैं । पकते-पकते जब जैम गाढ़ा
हो जाए तो एक किलोग्राम चीनी पर ६ से १० ग्राम तक साइट्रिक एसिड या एक कागज़ी नीबू का
रस मिला देते हैं । जैम की पहचान सॉस की तरह प्लेट टैस्ट के द्वारा करते हैं या फिर
ड्राप टैस्ट भी कर सकते हैं जैसे कि पानी से भरे हुए काँच के गिलास में ठण्डे जैम की
बूँद-बूँद करके गिराते हैं यदि बूँद सीधा गिलास की तली में जाकर बैठ जाए , घुले नहीं तो जैम तैयार समझते हैं । जैम के तैयार होने के बाद आग से तुरन्त
उतार लेते हैं । उसमें खाने वाला रंग और खुशबू मिलाकर गर्म-गर्म जैम को साफ और सूखी
शीशियों में भरते हैं पर स्ट्राबरी के जैम को ठंडा होने पर ही भरते हैं ।
सेव का जैम
सामग्री- ५ किलोग्राम सेब, चीनी-साढ़े तीन किलोग्राम,
साइट्रिक एसिड- ४ चाय के चम्मच , पानी- जिसमें
गूदा डूब जाए, रंग-थोड़ा-सा ।
विधि- जैसे कि ऊपर लिखा गया है ।
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