जब मैं कक्षा बारह में थी , तब मेरठ में पढ़ रही थी । गर्मी की छुट्टियों मैंने फल संरक्षण सरकारी संस्था से पंद्रह दिनों का कोर्स किया । इसमें मैनें कई तरह के फलों से मुरब्बा, जैम, जैली, अचार, स्कैवैस , चटनी और सॉस आदि बनाना सीखा । आज समय बदल गया है, सब कुछ बना-बनाया उपलब्ध है । फिर भी मैंने सोचा कि क्यों न सीखा हुआ सब कुछ सबके साथ बांटा जाए । मैनें ये सब कुछ जब मेरे बच्चे छोटे थे तब सब बनाया है । हर चीज स्वादिष्ट बनती है और साथ ही खराब भी नहीं होती । सबसे महत्त्वपूर्ण घर पर बनाने की वजह से इसमें बरकत है। आशा है कि शायद कुछ लोग लाभान्वित होंगे ।
(१.) नीबू का अचार
सामग्री- नीबू- एक किलोग्राम, नमक-२०० ग्राम, काला नमक- ५० ग्राम, काली मिर्च- २५ ग्राम, गर्म मसाला-२५ ग्राम, हींग- एक चने के बराबर,
अजवाइन- २५ ग्राम, काला जीरा- १० ग्राम ।
विधि- नीबू के चार टुकड़े करके मसाला मिलाकर नीबुओं में
भर कर धूप में रख देना है । मीठे अचार में अजवाइन नहीं डालते हैं वरना सारी सामग्री
वैसे ही है और मीठे अचार में अपनी मनपसन्द अथवा अपने स्वादानुसार चीनी डालनी है ।
(२.) गोभी, गाजर और शलजम का अचार
सामग्री- सब्ज़ी के टुकड़े- ५ किलोग्राम, नमक- ५०० ग्राम, हल्दी- ५० ग्राम, राई-२५० ग्राम, लालमिर्च- ५० ग्राम, गर्म मसाला- १०० ग्राम, मेथी-५० ग्राम, सौंफ- १०० ग्राम, कलौंजी-५० ग्राम, प्याज- २५० ग्राम, लहसुन-५० ग्राम, अदरक-२५० ग्राम , इमली- २५० ग्राम, गुड़- आधा किलोग्राम, हरी मिर्च- २५० ग्राम, खाने वाल कोई भी तेल- एक किलोग्राम, एसीटिक एसिड- ५०
मिलीलीटर या १०-१२ चाय के चम्मच ।
विधि- सब्ज़ी को टुकड़ों में काटकर उबलते हुए पानी में
डालकर थोड़ा-सा गला लेते हैं। गर्म पानी से निकालकर तुरन्त ही ठंडे पानी में डाल देते
हैं। ठंडे पानी से निकालकर कुछ देर के लिए रख देते हैं। नमक, हल्दी, मोटी
कुटी हुई राई मिलाकर तीन चार दिन धूप में रखते हैं । धूप में रखते समय रोज़ भगोने को
हिलाते रहते हैं । एक अलग बर्तन में तेल को गर्म करते हैं । उसमें प्याज, लहसुन के बारीक टुकड़े डालकर भूनते हैं । गुलाबी हो जाने पर उसमें मसाला और
तवे पर भुनी हुई मेथी और सौंफ मिला देते हैं ( सौंफ और मेथी को तवे में भूनने के बाद
मोटा कूट लेते हैं) । मसाला डालने के तुरन्त बाद ही गुड़ और इमली को थोड़े-से पानी में
पकाकर छानने के बाद प्राप्त निचोड़ को तेल में मिला देते हैं। इसमें एसीटिक एसिड मिलाकर
सब को मिला देते हैं। अचार को अच्छी तरह से चलाकर मर्तबान में भर देते हैं । एक-दो
दिन धूप दिखाने के बाद खाते हैं या प्रयोग में लाते हैं। अदरक को खुरच कर बारीक-बारीक
लम्बे-लम्बे टुकड़ों में काट लेते हैं । हरी मिर्च को बीच में चीरा लगा देते हईम । अदरक
और हरी मिर्च सब्ज़ी के टुकड़ों में नमक, राई और हल्दी के साथ मिलाई
जाती है। कटहल के अचार भी ऐसे ही बनाया जाता है पर इस में गुड़ और इमली नहीं मिलाते
।
(३.) लाल मिर्च का अचार
सामग्री- लालमिर्च- डेढ़ किलोग्राम, मेथी- ६० ग्राम, सूखा धनिया- ६० ग्राम, सौंफ- ६० ग्राम, कलौंजी-३० ग्राम, हल्दी- ६० ग्राम, नमक-१८० ग्राम, हींग- एक चने के बराबर, सरसों या राई- २५० ग्राम, अमचूर-२५० ग्राम, खाने का कोई भी तेल-२ किलोग्राम।
विधि- मेथी, धनिया और सौंफ सबको तवे पर हल्का
भूनकर अलग-अलग पीसना है और छानना है। सरसों अथवा राई को भी तवे पर हल्का-सा भूनकर मोटा
अथवा दरदरा पीसना है । सारे मसालों को तेल में अच्छी तरह से सान लेना है । लाल मिर्च
को सिर अथवा ऊपर की तरफ से काटकर बीज निकाल लेते हैं । बीज निकालने से पहले मिर्च को
एक से दो दिन धूप में रखते हैं। लाल मिर्च के बीजों को मसाले में मिला देते हैं। मसाले
को दबा-दबा कर मिर्च में भरते हैं। फिर मिर्च को तेल में डुबो-डुबो कर मर्तबान में
भर देते हैं। बचे हुए तेल को भी ऊपर से मर्तबान में डाल देते हैं । अचार को आठ-दस दिन
धूप में रखते हैं फिर प्रयोग में लाते हैं ।
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