जब मैं कक्षा बारह में थी , तब मेरठ में पढ़ रही थी । गर्मी की छुट्टियों मैंने फल संरक्षण सरकारी संस्था से पंद्रह दिनों का कोर्स किया । इसमें मैनें कई तरह के फलों से मुरब्बा, जैम, जैली, अचार, स्कैवैस , चटनी और सॉस आदि बनाना सीखा । आज समय बदल गया है, सब कुछ बना-बनाया उपलब्ध है । फिर भी मैंने सोचा कि क्यों न सीखा हुआ सब कुछ सबके साथ बांटा जाए । मैनें ये सब कुछ जब मेरे बच्चे छोटे थे तब सब बनाया है । हर चीज स्वादिष्ट बनती है और साथ ही खराब भी नहीं होती । सबसे महत्त्वपूर्ण घर पर बनाने की वजह से इसमें बरकत है। आशा है कि शायद कुछ लोग लाभान्वित होंगे ।
टॉफी
टॉफी किसी भी गूदेदार
फल से बनाई जा सकती है । जैली बनाने के बाद बचे हुए गूदे से भी टॉफी बनाई जा सकती है
। टॉफी में चीनी की मात्रा लगभग ८० प्रतिशत होती है । इस कारण इसका संरक्षण चीनी से
होता है ।
सामग्री- फल का गूदा- १ किलोग्राम, चीनी-५०० ग्राम से ९५० ग्राम तक,
साइट्रिक एसिड- ४ से ६ ग्राम ( एक किलोग्राम चीनी पर एक या डेढ़ चम्मच),
मक्खन- ५० ग्राम एक किलोग्राम चीनी के लिए, नमक-
चुटकी भर ।
विधि- फल से पहले जैम की तरह गूदा प्राप्त कर लेते हैं
। गूदे में चीनी मिलाकर पकने के लिए रख देते हैं और उसको बराबर चलाते रहते हैं । बीच-बीच
में थोड़ा-थोड़ा करके मक्खन डालते रहते हैं । मक्खन डालने से गूदे का उछलना बन्द हो जाता
है और गूदा भगोने की तली में लगता नहीं है । पकते-पकते गूदा लगभग गाढ़ा हो जाए तो इसके
तैयार होने की पहचान करने के लिए थोड़ी-सी टॉफी लेकर ठंडा करते हैं । उंगुली में मक्खन
लगाकर उसकी गोली बनाते हैं । यदि गोली हाथ में बिना चिपके हुए आसानी से बन जाए तो टॉफी
को तैयार समझते हैं । तैयार होने से कुछ देर पहले नमक मिला देते हैं । अगर रंग मिलाना
चाहें तो इसी के साथ मिला दें । तैयार होने पर भगोने को आग से उतार कर गर्म-गर्म टॉफी
को मक्खन लगी हुई थाली में फैला देते हैं। मक्खन लगे हुए बर्तन से ऊपर की सतह बराबर
कर देते हैं । ठंडी होने पर मनचाहे आकार में काट लेते हैं । टॉफी को बटर पेपर में लपेट
कर पोलीथीन बैग में सुरक्षित रख लेते हैं ।
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